
|| Shri SitaRam ||
A Brief Biography Manas Vyas Shri Puneet Pathak Ji Manas Vyas Shri Puneet Pathak Ji is the grandson of Saketwasi Manas Martand Goswami Shri Indubhushan Ramayani Ji Maharaj and the son of Shri Pradeep Pathak Ji and Smt. Kalpana Pathak Ji.He was born on *01st July 1998, at 04:15 PM*, on the auspicious day of *Ashadha Shukla Ashtami, Gupt Navratri*.*Childhood and Divine Association:*From his childhood, he was very dear to his grandfather. When he was only 6 months old, Pujya Goswami Ji took him alone with him to Nau-jheel for a Katha. It was his divine test to see if he could live without his mother. He did, and from then on, he remained in Dadaji’s close association. Pujya Dadaji used to take him to many Katha venues like Rameshwaram, Bhiwani etc.His early schooling was completed at *Vrindavan Public School, Vrindavan* and he obtained his *Graduation in English from Agra University.*In his childhood itself, he was studying Valmiki Ramayana in the holy presence of *Shri Swami Govardhan Rangacharya, Chaturth Shri Balak Swami Ji, Shri Rangnath Mandir, Vrindavan.* Seeing this, his grandfather gave him the divine idol of *Shri Rangnath Bhagwan* for worship.*Initiation and Guru’s Command:*On the sacred festival of *Guru Purnima, July 2010*, Pujya Dadaji himself initiated him with the *Shri Ram Mantra*, therefore Pujya Dadaji himself is his *Sadgurudev.*From infancy, he was skilled in Rudrabhishek, recitation and worship. For the first time, in front of *Shri Anjani Nandan Hanuman Ji Maharaj* seated at Manas Mandir, Pujya Dada Shri gave him the order to recite the *Kishkindha-Kand.*Thereafter, on *09th March 2011*, the day Pujya Dadaji left for Saket, in the early morning when he came to pay obeisance to him before going to school, he said to him – *”This is Vyas Peeth, Be-aas Peeth, never sit here with any expectation (Aasha) and from now on, do one Maas Parayan of Ramcharitmanas daily and I entrust you with the Seva-Puja of my personal Thakur”* – which is still the daily routine of his life.*Katha Journey:*After the Saket Gaman of Pujya Dadaji, at the mere age of *13-14 years*, he first narrated Katha continuously for *3 months to Shri Anjani Nandan Hanuman Ji Maharaj* seated in Manas Mandir. Along with academic education, he also managed Katha.His second Katha was held at *Pawai Nagar, Panna district, Madhya Pradesh.* After that, his Kathas started happening all over India including Bihar, Jharkhand, Delhi, Maharashtra, Rajasthan, Punjab, Nepal etc.He belongs to the *5th generation in the Manas Ramayani Tradition*, therefore he is *Paramparanuvarti.* He is both the *grandson and also the disciple* of Saketwasi Manas Martand Goswami Shri Indubhushan Ramayani Ji Maharaj, he has received both *Naad and Bindu traditions.**Title and Honour:*In the year *2016*, at the very ancient place of Vrindavan, *Shri Purana Katiya Ashram*, on the Tirobhav Tithi of *Shri Shri 108 Dr. Swami Pragya Das Ji Katiya Baba*, in the event organized by the present Peethadhishwar *Shri Sadguru Das Ji Katiya*, he was honoured with the title of *”Manas Kinkar”* on behalf of *Vaishnav Chatur Sampraday.**Seva Projects:*In the year *2017*, to preserve the heritage of his ancestors, with the inspiration of Pujya Manas Martand Saketwasi Shri Indubhushan Goswami Ji Maharaj, *Shri Ram Katha Satsang Trust was established.* Under the Trust, several projects are running – Manas Mandir Management, Hanumat Gausadan, Free R.O. Water Seva in the sacred memory of Goswami Shri Indubhushan Ji Maharaj, Digitalization and Preservation of all Audio Cassettes, Videos, VHS of Manas Martand Saketwasi Goswami Shri Indubhushan Ramayani Ji Maharaj and re-printing of his Granthawali – Shri Hanuman Chalisa Bhashya, Kishkindha Kand Bhashya, Tulsi Manas Manjari, Savidhi Anushthanik Sundarkand Paath, Bhaktraj Kevat.Even today, he is rendering his services through Shri Ram Katha.*|| Siya-Ram-May Sab Jag Jani ||
|| श्री सीताराम ||
संक्षिप्त जीवन परिचय
मानस व्यास श्री पुनीत पाठक जी
मानस व्यास श्री पुनीत पाठक जी साकेतवासी मानस मार्तण्ड गोस्वामी श्री इन्दुभूषण रामायणी जी महाराज के पौत्र तथा श्री प्रदीप पाठक जी एवं श्रीमती कल्पना पाठक जी के पुत्र हैं।
आपका जन्म 01 जुलाई 1998, सायं 04:15 बजे, आषाढ़ शुक्ल अष्टमी, गुप्त नवरात्रि के पावन दिन हुआ।
बाल्यावस्था और दिव्य सानिध्य:
बाल्यावस्था से ही आप अपने दादाजी के अत्यंत प्रिय थे। जब आप मात्र 6 माह के थे, तब पूज्य गोस्वामी जी आपको अकेले अपने साथ नौहझील कथा में ले गए। यह आपकी दिव्य परीक्षा थी कि क्या आप माता के बिना रह सकते हैं। आप रहे और तब से आप दादाजी के सानिध्य में ही रहे। पूज्य दादाजी आपको रामेश्वरम, भिवानी आदि अनेक कथा स्थलों पर ले जाते थे।
आपकी प्रारंभिक शिक्षा वृंदावन पब्लिक स्कूल, वृंदावन से पूर्ण हुई और आपने आगरा विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में स्नातक किया।
बाल्यकाल में ही आप श्री रंगनाथ मंदिर, वृंदावन के चतुर्थ श्री बालक स्वामी जी, श्री स्वामी गोवर्धन रंगाचार्य जी की सन्निधि में वाल्मीकि रामायण का अध्ययन कर रहे थे। यह देखकर आपके दादाजी ने आपको पूजन हेतु श्री रंगनाथ भगवान की दिव्य मूर्ति प्रदान की।
दीक्षा और गुरु आज्ञा:
गुरु पूर्णिमा, जुलाई 2010 के पावन पर्व पर पूज्य दादाजी ने स्वयं आपको श्री राम मंत्र की दीक्षा दी, अतः पूज्य दादाजी ही आपके सद्गुरुदेव हैं।
शैशवावस्था से ही आप रुद्राभिषेक, पाठ एवं पूजन में निपुण थे। प्रथम बार मानस मंदिर में विराजमान श्री अंजनी नंदन हनुमान जी महाराज के समक्ष पूज्य दादा श्री ने आपको किष्किन्धा-काण्ड का पाठ करने का आदेश दिया।
तत्पश्चात 09 मार्च 2011 को, जिस दिन पूज्य दादाजी साकेत पधारे, प्रातःकाल जब आप विद्यालय जाने से पूर्व उन्हें प्रणाम करने आए, तो उन्होंने आपसे कहा – “यह व्यास पीठ है, बे-आस पीठ है, कभी किसी आशा से यहाँ मत बैठना और आज से प्रतिदिन रामचरितमानस का एक मास पारायण करना और मेरे निज ठाकुर जी की सेवा-पूजा मैं तुम्हें सौंपता हूँ” – जो आज भी आपके जीवन की नित्य दिनचर्या है।
कथा यात्रा:
पूज्य दादाजी के साकेत गमन के पश्चात मात्र 13-14 वर्ष की आयु में आपने सर्वप्रथम मानस मंदिर में विराजमान श्री अंजनी नंदन हनुमान जी महाराज को लगातार 3 माह तक कथा सुनाई। शैक्षणिक शिक्षा के साथ-साथ आपने कथा का निर्वहन भी किया।
आपकी दूसरी कथा पवई नगर, जिला पन्ना, मध्य प्रदेश में हुई। उसके पश्चात बिहार, झारखण्ड, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब, नेपाल आदि सहित सम्पूर्ण भारत में आपकी कथाएँ होने लगीं।
आप मानस रामायणी परम्परा की 5वीं पीढ़ी से हैं, इसलिए आप परम्परानुवर्ती हैं। आप साकेतवासी मानस मार्तण्ड गोस्वामी श्री इन्दुभूषण रामायणी जी महाराज के पौत्र भी हैं और शिष्य भी, आपको नाद और बिन्दु दोनों परम्पराएँ प्राप्त हैं।
उपाधि और सम्मान:
वर्ष 2016 में वृंदावन के अति प्राचीन श्री पुराना कटिया आश्रम में, श्री श्री 108 डॉ. स्वामी प्रज्ञा दास जी कटिया बाबा की तिरोभाव तिथि पर, वर्तमान पीठाधीश्वर श्री सद्गुरु दास जी कटिया द्वारा आयोजित कार्यक्रम में आपको वैष्णव चतुः सम्प्रदाय की ओर से “मानस किंकर” की उपाधि से सम्मानित किया गया।
सेवा प्रकल्प:
वर्ष 2017 में अपने पूर्वजों की धरोहर को संरक्षित करने हेतु, पूज्य मानस मार्तण्ड साकेतवासी श्री इन्दुभूषण गोस्वामी जी महाराज की प्रेरणा से श्री राम कथा सत्संग ट्रस्ट की स्थापना की गई। ट्रस्ट के अंतर्गत कई प्रकल्प चल रहे हैं – मानस मंदिर प्रबंधन, हनुमत गौसदन, गोस्वामी श्री इन्दुभूषण जी महाराज की पावन स्मृति में निःशुल्क आर.ओ. जल सेवा, मानस मार्तण्ड साकेतवासी गोस्वामी श्री इन्दुभूषण रामायणी जी महाराज के समस्त ऑडियो कैसेट, वीडियो, VHS का डिजिटलीकरण एवं संरक्षण तथा उनके ग्रन्थावली – श्री हनुमान चालीसा भाष्य, किष्किन्धा काण्ड भाष्य, तुलसी मानस मंजरी, सविधि अनुष्ठानिक सुन्दरकाण्ड पाठ, भक्तराज केवट का पुनः प्रकाशन।
आज भी आप श्री राम कथा के माध्यम से अपनी सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं|| श्री सीताराम ||### संक्षिप्त जीवन परिचय### _मानस व्यास श्री पुनीत पाठक जी_मानस व्यास श्री पुनीत पाठक जी साकेतवासी मानस मार्तण्ड गोस्वामी श्री इन्दुभूषण रामायणी जी महाराज के पौत्र तथा श्री प्रदीप पाठक जी एवं श्रीमती कल्पना पाठक जी के पुत्र हैं।आपका जन्म _01 जुलाई 1998, सायं 04:15 बजे_, आषाढ़ शुक्ल अष्टमी, गुप्त नवरात्रि के पावन दिन हुआ।*बाल्यावस्था और दिव्य सानिध्य:*बाल्यावस्था से ही आप अपने दादाजी के अत्यंत प्रिय थे। जब आप मात्र 6 माह के थे, तब पूज्य गोस्वामी जी आपको अकेले अपने साथ नौहझील कथा में ले गए। यह आपकी दिव्य परीक्षा थी कि क्या आप माता के बिना रह सकते हैं। आप रहे और तब से आप दादाजी के सानिध्य में ही रहे। पूज्य दादाजी आपको रामेश्वरम, भिवानी आदि अनेक कथा स्थलों पर ले जाते थे।आपकी प्रारंभिक शिक्षा वृंदावन पब्लिक स्कूल, वृंदावन से पूर्ण हुई और आपने आगरा विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में स्नातक किया।बाल्यकाल में ही आप श्री रंगनाथ मंदिर, वृंदावन के चतुर्थ श्री बालक स्वामी जी, श्री स्वामी गोवर्धन रंगाचार्य जी की सन्निधि में वाल्मीकि रामायण का अध्ययन कर रहे थे। यह देखकर आपके दादाजी ने आपको पूजन हेतु श्री रंगनाथ भगवान की दिव्य मूर्ति प्रदान की।*दीक्षा और गुरु आज्ञा:*गुरु पूर्णिमा, जुलाई 2010 के पावन पर्व पर पूज्य दादाजी ने स्वयं आपको श्री राम मंत्र की दीक्षा दी, अतः पूज्य दादाजी ही आपके सद्गुरुदेव हैं।शैशवावस्था से ही आप रुद्राभिषेक, पाठ एवं पूजन में निपुण थे। प्रथम बार मानस मंदिर में विराजमान श्री अंजनी नंदन हनुमान जी महाराज के समक्ष पूज्य दादा श्री ने आपको किष्किन्धा-काण्ड का पाठ करने का आदेश दिया।तत्पश्चात 09 मार्च 2011 को, जिस दिन पूज्य दादाजी साकेत पधारे, प्रातःकाल जब आप विद्यालय जाने से पूर्व उन्हें प्रणाम करने आए, तो उन्होंने आपसे कहा – “यह व्यास पीठ है, बे-आस पीठ है, कभी किसी आशा से यहाँ मत बैठना और आज से प्रतिदिन रामचरितमानस का एक मास पारायण करना और मेरे निज ठाकुर जी की सेवा-पूजा मैं तुम्हें सौंपता हूँ” – जो आज भी आपके जीवन की नित्य दिनचर्या है।*कथा यात्रा:*पूज्य दादाजी के साकेत गमन के पश्चात मात्र 13-14 वर्ष की आयु में आपने सर्वप्रथम मानस मंदिर में विराजमान श्री अंजनी नंदन हनुमान जी महाराज को लगातार 3 माह तक कथा सुनाई। शैक्षणिक शिक्षा के साथ-साथ आपने कथा का निर्वहन भी किया।आपकी दूसरी कथा पवई नगर, जिला पन्ना, मध्य प्रदेश में हुई। उसके पश्चात बिहार, झारखण्ड, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब, नेपाल आदि सहित सम्पूर्ण भारत में आपकी कथाएँ होने लगीं।आप मानस रामायणी परम्परा की 5वीं पीढ़ी से हैं, इसलिए आप परम्परानुवर्ती हैं। आप साकेतवासी मानस मार्तण्ड गोस्वामी श्री इन्दुभूषण रामायणी जी महाराज के पौत्र भी हैं और शिष्य भी, आपको नाद और बिन्दु दोनों परम्पराएँ प्राप्त हैं।*उपाधि और सम्मान:*वर्ष 2016 में वृंदावन के अति प्राचीन श्री पुराना कटिया आश्रम में, श्री श्री 108 डॉ. स्वामी प्रज्ञा दास जी कटिया बाबा की तिरोभाव तिथि पर, वर्तमान पीठाधीश्वर श्री सद्गुरु दास जी कटिया द्वारा आयोजित कार्यक्रम में आपको वैष्णव चतुः सम्प्रदाय की ओर से “मानस किंकर” की उपाधि से सम्मानित किया गया।*सेवा प्रकल्प:*वर्ष 2017 में अपने पूर्वजों की धरोहर को संरक्षित करने हेतु, पूज्य मानस मार्तण्ड साकेतवासी श्री इन्दुभूषण गोस्वामी जी महाराज की प्रेरणा से श्री राम कथा सत्संग ट्रस्ट की स्थापना की गई। ट्रस्ट के अंतर्गत कई प्रकल्प चल रहे हैं – मानस मंदिर प्रबंधन, हनुमत गौसदन, गोस्वामी श्री इन्दुभूषण जी महाराज की पावन स्मृति में निःशुल्क आर.ओ. जल सेवा, मानस मार्तण्ड साकेतवासी गोस्वामी श्री इन्दुभूषण रामायणी जी महाराज के समस्त ऑडियो कैसेट, वीडियो, VHS का डिजिटलीकरण एवं संरक्षण तथा उनके ग्रन्थावली – श्री हनुमान चालीसा भाष्य, किष्किन्धा काण्ड भाष्य, तुलसी मानस मंजरी, सविधि अनुष्ठानिक सुन्दरकाण्ड पाठ, भक्तराज केवट का पुनः प्रकाशन।आज भी आप श्री राम कथा के माध्यम से अपनी सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं।_|| सिया-राम-मय सब जग जानी ||_

